
दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत के शहर मिनाब में 28 फरवरी को जो हुआ, उसने “कोलैटरल डैमेज” जैसे ठंडे शब्दों को शर्मिंदा कर दिया। एक स्कूल जहां कॉपियों में A, B, C और अलिफ़, बे, पे लिखा जा रहा था कुछ ही मिनटों में मलबे का ढेर बन गया। 165 छात्राएं। सिर्फ एक संख्या नहीं। 165 अधूरे सपने।
चार दिन की जंग, चौथी क्लास तक की बच्चियां
मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच यह हमला हुआ। अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है लेकिन जवाबी कार्रवाई की आग जब स्कूल तक पहुंच जाए, तो सवाल मिसाइल से बड़ा हो जाता है।
राहतकर्मियों ने जब मलबा हटाना शुरू किया, तो धूल के साथ चीखें भी उठीं। छोटे-छोटे बैग, टूटी स्लेटें, और सफेद रिबन मलबे में दबे मिले।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 165 छात्राओं की मौत हुई जिनमें ज्यादातर प्राथमिक कक्षाओं की बच्चियां थीं।
युद्ध का गणित बड़ा सीधा होता है टारगेट, रेंज, इम्पैक्ट। लेकिन इस हमले ने एक और समीकरण जोड़ दिया पावर पॉलिटिक्स = चाइल्डहुड की कीमत।
मातम में डूबा मिनाब
आज मिनाब की सड़कों पर सन्नाटा था, लेकिन सन्नाटा भी शोर कर रहा था। हजारों लोग जनाजे की नमाज के लिए इकट्ठा हुए। सफेद कफन में लिपटे छोटे-छोटे ताबूत कतार में रखे गए। बाजार बंद रहे। लोगों ने काली पट्टियां बांधीं। माएं रो-रोकर बेहोश हुईं। यह कोई टीवी डिबेट का “इमोशनल पैकेज” नहीं था यह शहर का फटा हुआ दिल था।
वैश्विक राजनीति और मासूम चेहरों का सच
जंग की टेबल पर बैठे नेता शायद “स्ट्रैटेजिक रेस्पॉन्स” लिखते हैं। लेकिन जमीन पर लिखा जाता है “अनकहे नाम”।
क्या यह हमला जानबूझकर था? क्या यह जवाबी कार्रवाई की चूक थी? या फिर युद्ध का वही पुराना चेहरा, जो हमेशा सबसे कमजोर को निगलता है?

दुनिया की महाशक्तियां बयान जारी करेंगी। निंदा होगी। जांच की मांग होगी। लेकिन मिनाब के घरों में आज किताबों की जगह खामोशी रखी है।
जब ताकतवर देशों की बहस “सिक्योरिटी” पर होती है, तो बच्चों की सुरक्षा फुटनोट बन जाती है। मिसाइलें कभी धर्म नहीं पूछतीं, लेकिन वे स्कूल का रास्ता भी भूल जाती हैं।
जंग का असली चेहरा
यह हमला सिर्फ एक शहर की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आईना है। अगर युद्ध की रणनीति में बच्चों की जान “साइड इफेक्ट” बन जाए, तो असली हार किसकी है?
मिनाब की 165 बच्चियां अब किसी राजनीतिक बयान का हिस्सा नहीं वे इतिहास के पन्नों पर दर्ज एक काला धब्बा हैं।
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